करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




कही नहीं जाती हर बात।।


Tuesday, 02 October 2018 20:53:19
Manju Thapa

कही नहीं जाती हर बात।।

चाँदनी कहती नहीं कि देख लो मेरी रोशनी।।

सरगम कहती नहीं गुनगुनाओ मेरी रागिनी।।।

शब्द जो बंधते हमेशा नए रूप रंग में, वो कभी कहते नहीं कि ढूंढ लो हर वर्तनी।।

आग में वो ताप है कि जला से सम्पूर्ण जहाँ, तब भी कहता कहाँ की मुझसा

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नववर्ष


Tuesday, 02 October 2018 09:40:37
Manju Thapa

नव स्वर्णिम बेला का सुभागमन,

कर देता पुरानी स्मृतिया विलीन।।

पर कुछ सुख के साथ

उज्जवलता का दे हाथ

मधुर स्वप्न देखने के लिए दिन,

और हम हो जायें आस में लीन।।

समय प्रोत्साहित करता,

गिरने पर सम्हालता

यदि दुःखी तो आस क

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सवेरा


Tuesday, 02 October 2018 09:44:15
Manju Thapa

ढल गया नभ का अँधेरा।।

आगमन कर रहा

पूर्ण बाँह फैला, सवेरा।।

 

शर्बरी का श्यामल घूँघट,

खोल रहा चंचलता थामे।।

पवन सुगन्धित बहकर,

यह सुख

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झंझावत


Tuesday, 02 October 2018 09:48:13
Manju Thapa

कही मिलता नहीं किनारा,

चक्रवातों में घिरकर।।

ढूंढ भी नहीं रहे सहारा,

संसार में फिरकर।।

सफल हो रही जटिलताएं,

संकट को यूँही पाकर।।

जैसे छीन रहा कोई

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अभिलाषाएं


Sunday, 07 October 2018 07:15:41
Manju Thapa

अभिलाषाएं कितनी शेष हैं।

व्यथित मन की

कोई पुकारता कहता है

चले दूर है

अनंत

उत्तर सिंधु में डूब हुआ है

नहीं जानता है

प्रश्न पुराना

श्रेष्ठ

आओ थोड़ा खोज ले

रूककर दिशाओं में

मिले समाधान

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