करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




जीवन कुछ चलता है ऐसे


Tuesday, 04 May 2021 01:45:41
Manju Thapa

जीवन कुछ चलता है ऐसे।। 

दुःख से राग, सुख से विराग, 
बन बिहाग सजता है जैसे।। 
जीवन कुछ चलता है ऐसे।। 

प्रीत संकुचित, मीत किंचित, 
तृण मात्र बिखरे ना कैसे।। 
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प्रेरणा


Saturday, 13 February 2021 09:08:15
Manju Thapa

विवश नहीं बस हारा हूँ, 
रुक जाऊँगा थोड़ी देर।।
निमग्न अंधकार के वश,
उगता सूरज पर सवेर।।
भूल ना जाना मेरे मन तू, 
पाकर इस तन की पीर।। 
चलना दो गुना बढ़कर है,
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धीर


Wednesday, 10 February 2021 17:10:42
Manju Thapa

धरता क्यों नहीं ये धीर, 

छुपाता है मन कोई पीर।। 

सजल हुए नेत्रों के कोर, 
उलझन से सने पोर पोर।। 

बिखरी जीवन की कड़ी, 
मिलती ना शांति इक घड़ी।। 

द्वंद्व

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निद्रा-संसार


Thursday, 30 July 2020 01:31:36
Manju Thapa

संवेदना के गहरे पार,

              ये स्नायु तंत्र बिखर जाता है।
झीने दुःखों के खुले द्वार
              और जल कुंड झर जाता है।
इस चेतन मन के स्पंदन में,
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जब प्यार होता है


Thursday, 09 July 2020 00:58:14
Manju Thapa

जब प्यार होता है।

ये संसृति रुक जाती है साथ हमारे
एक क्षण बहुत संवेदनाएं जी लेता है
सुदूर क्षेत्र तक जाती है ध्वनियां
और मस्तिष्क उन्हें खोज़ लाता है

जब प्यार होता है।
एक पल में कई सदियां गिना देता है<

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