करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




समय


Sunday, 07 October 2018 07:19:56
Manju Thapa

कुछ बात भूल जाता है समय।

कुछ पल याद करता है समय।

कुछ प्रसन्न मन जीता है समय।

कुछ दुःख में डूब जाता समय।

कुछ निराशा में घुलता समय।

कुछ आशा में जीता समय।

कुछ राग गुनगुनाता है समय।

कुछ ऋतुओं को संवारता समय।

कुछ नटखट

Read More


कपट


Sunday, 07 October 2018 07:23:14
Manju Thapa

समझ सकता है वो कैसे ,

जो कठोर हृदय को जीता है।।

गरल पात्र को सामने रखकर,

स्वयं अमृत को पीता है।।

द्वेष विद्वेष की बातें कहकर,

मन में विष भर चल देता।

Read More


पलायन कर ना सकूँगा मैं


Sunday, 07 October 2018 07:28:18
Manju Thapa

पलायन कर ना सकूँगा मैं।।

शून्य क्षितिज़ के आँगन से।

नीलाभ रजत के प्रांगण से।

श्याम मेघ की सौदामिनी से।

वर्षा की मृदु कामिनी से।

पलायन कर ना सकूँगा मैं।।

जीवन के हर उत्सव से।

बसंत के खिले पल्लव नव से।

लहरों के उठ गि

Read More


जीवन चलता जाता है


Sunday, 07 October 2018 07:30:53
Manju Thapa

सुख दुःख की परिपाटी पर,

ये जीवन चलता जाता है।।

अनंत पदचापों से चल राह,

नित गीत सुरीले गात है।।

खोया बहुत पाया असंख्य,

अनुभव यही सिखाता है।।

जितना बीता और रीता था,

उसका भी साथ निभाता है।।

ये जीवन चलता जाता है

Read More


पाती


Sunday, 07 October 2018 07:35:52
Manju Thapa

पाती अरुण छवि की ओस की बूँदों को,

जो हरी भरी धरा पर बिखरी हुई है।।

पाती सुवासित समीर के मृदुल कणों को,

जो सुन्दर प्रकृति पर घिरी हुई है।।

पाती रश्मिपूरित मेघ की रिमझिम को,

जो क्षितिज़ पार जाकर बरस रही है।।

पाती सरिता के निच्छल वेग

Read More

Search By: Subject Content


Most Recent