करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




परीक्षाकाल


Sunday, 07 October 2018 07:39:46
Manju Thapa

अशोक के स्थिर युगों के साथ,

ख़त्म हुआ ये परीक्षाकाल।।

निकल चला हूँ मैं यायावर,

अपने पथ की लेकर चाल।।

कुछ उमंग सी भावों में उभरी,

शेष लुप्त हुई स्मृति में।।

कुछ को किया जागृत सपनों में,

कुछ स्थिरता से आयी गति में।।

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