करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




कुछ लोग


Tuesday, 28 April 2020 07:44:34
Manju Thapa

कुछ लोग,सिर्फ बातों  के अपने  होते हैं।

कुछ लोग ,देखने  भर  के सपने होते  हैं।
कुछ लोग,वो दया दिखाते  हृदय के पार।
कुछ लोग,सँभालते आपका दुःख अपार।
कुछ लोग, हवा से हलके होते उड़  जाते।
कुछ लोग,जहां भी मौ

Read More


 प्रयास


Tuesday, 28 April 2020 01:53:17
Manju Thapa

मैंने रोका नहीं, 

उन द्रुत चलते क़दमों को,जो भाग जाना चाहते हैं बिना किसी वजह ..
और कभी भी ना लौटने की संज्ञा के साथ ।।

मैंने तोड़ा नहीं,
उन संकुचित वर्जनाओं

Read More


चलता हूँ मैं नित नई भोर


Tuesday, 28 April 2020 01:34:21
Manju Thapa

चलता हूँ मैं नित नई भोर।।


पलछिन बीते दिन को देता आभार,
स्मृति  में  रखकर  चलता  बारंबार,
पकड़े हुए इसका हर छोर।
चलता हूँ मैं नित नई भोर।।

तुम और मैं के अहम् से  जागकर,
बीती

Read More


  व्यंग्य


Tuesday, 28 April 2020 01:27:29
Manju Thapa

तिनके तिनके सी मेरी बात,

                     बिखराते जो आस  पास।।
कितने उनके पल निखरे,
                     कितनों ने बनाया उपहास।।
Read More


 ये रात


Monday, 27 April 2020 22:42:24
Manju Thapa

ये रात स्याह  घनी अँधेरी सी।

इसमें चाँदनी की चमक नहीं,
मारुत बहकर नहीं गुनगुनाता,
झीना झीना  क्षण  लहराता।।

ये रात स्याह घनी अँधेरी सी।
इसमें  जुगनु  खिलते  नहीं,
पक्षियों का गान ठि

Read More

Search By: Subject Content


Most Recent