करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




अश्रु-गीत


Saturday, 02 May 2020 01:53:39
Manju Thapa

लेकिन मैं रुक न  सका

इन भीगी पलकों के बीच
टूटकर भी गिर ना सका
स्याह-पीले कपोलों को सींच।।

                     मद्धम हुई दीप्त ज्योति
       

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सत्य-असत्य


Saturday, 02 May 2020 01:32:39
Manju Thapa

असत्य के बढ़ते  कदम,

सत्य के दीपक को ढूँढने निकले।
स्वयं तिमिर के गर्त में डूबे,
कहाँ नभ के सूर्य को देखने निकले।
उनींदें नयन,तेज नहीं,नहीं कोई अभिलाषा
आज केवल देखना है,
उसका प्रकाश यही देखने निकले।
कहाँ है उसके

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राग


Thursday, 30 April 2020 22:19:55
Manju Thapa

बीत जाती है दुःख की निशा।

तो सूरज है सुख  की  दिशा।।

उमड़ कर छुपाते बादल बातें,
विचारते पर बरस नहीं  पाते।
वर्षा  करती  इन  पर  प्रहार,
बूँदों से मचाती शोर अपार।।

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जीवन


Thursday, 30 April 2020 21:59:00
Manju Thapa

जीवन है एक परीक्षा काल।

रुक जाता कुछ आयामों पर,
चलकर अपनी गति से चाल।।

जन्म से बचपन और यौवन,
लेता नए नए प्रश्न पूछ।
किस किसका उत्तर ना दें,
आधे सच और आधे झूठ।
जीना इसके साथ हर हाल।
जीवन है एक

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साहस


Thursday, 30 April 2020 21:49:38
Manju Thapa

कहीं दूर अकेले निर्जनता में,

                     जाकर आँसू  बहाओ मत।
बीत जायेगा मुश्किल क्षण,
                     खुद को ऐसे छुपाओ मत।
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