करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




 स्वतंत्र


Monday, 27 April 2020 22:08:09
Manju Thapa

स्वतंत्र तन,स्वतंत्र मन और स्वतंत्र प्राण हैं।

स्वतंत्र हैं विचार और स्वतंत्र अभिमान है।।

स्वतंत्रता के झूले झूलते,
                 स्वतंत्र गगन को चूमते।
स्वतंत्र धरा के आँगन,
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              आँसू


Monday, 27 April 2020 08:43:54
Manju Thapa

मत करो प्रवाहित इन्हें सुदूर,

                     ये आँसू लो पलकों में मींच।
कोई नहीं करुणा करता इनसे,
                     स्वयं ही रखो इनको सीं

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     भाग नहीं सकते


Monday, 27 April 2020 08:25:12
Manju Thapa

भाग नहीं सकते,

उन बातों से जिनका कोई अस्तित्व नहीं है
और सुनते हैं।

भाग नहीं सकते,
उन रिश्तों से जिनको निभाना मुश्किल है
और ढोते हैं।

भाग नहीं सकते,
उन वचनों से जो प्रासंगिक ही नहीं है
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           मन निर्झर बहता है


Monday, 27 April 2020 08:11:40
Manju Thapa

मन निर्झर बहता है।

कभी शांत और कभी कल कल सा,
गहन और उथला भी,
निरंतर चलता अभिसार सा,
ये रुकता नहीं कभी
मन निर्झर बहता है।

कितने शीत की ठिठुरन से,
कितने ज्येष्ठ दावानल से,
गिरता उठता भाटे ज़्वार

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बचपन


Monday, 27 April 2020 04:14:05
Manju Thapa

निकल पड़ता है हर बचपन,स्कूल पढ़ने की चाह में।
भारी बोझ को साथ लिए,संग अपनों के इस राह में।
कई बातें मन की होती,कई झूठ-मूठ के किस्से।
मन करता जब खाने को ,टटोलते ज़ेब के सिक्के।
नन्ही आँखें सब देखती

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