करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




झंझावत


Tuesday, 02 October 2018 09:48:13
Manju Thapa

कही मिलता नहीं किनारा,

चक्रवातों में घिरकर।।

ढूंढ भी नहीं रहे सहारा,

संसार में फिरकर।।

सफल हो रही जटिलताएं,

संकट को यूँही पाकर।।

जैसे छीन रहा कोई

Read More


सवेरा


Tuesday, 02 October 2018 09:44:15
Manju Thapa

ढल गया नभ का अँधेरा।।

आगमन कर रहा

पूर्ण बाँह फैला, सवेरा।।

 

शर्बरी का श्यामल घूँघट,

खोल रहा चंचलता थामे।।

पवन सुगन्धित बहकर,

यह सुख

Read More


नववर्ष


Tuesday, 02 October 2018 09:40:37
Manju Thapa

नव स्वर्णिम बेला का सुभागमन,

कर देता पुरानी स्मृतिया विलीन।।

पर कुछ सुख के साथ

उज्जवलता का दे हाथ

मधुर स्वप्न देखने के लिए दिन,

और हम हो जायें आस में लीन।।

समय प्रोत्साहित करता,

गिरने पर सम्हालता

यदि दुःखी तो आस क

Read More

Search By: Subject Content


Most Recent