करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




प्रलय


Wednesday, 13 May 2020 21:43:30
Manju Thapa

जब प्रलय आता है,
तो सब बहाकर ले जाता है।।
विध्वंश का प्रतिरूप,
अशेष....
कितने तुंग पर्वत,गहर नदियां, अनंत गहरे सागर और आकाश को कंपित अनुभव कराता क्षितिज़....
ये सब सहम जाते है।..
और ये इनकी परवाह किये बिना निस्तेज से

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कुछ


Wednesday, 13 May 2020 20:22:35
Manju Thapa

जब कुछ भी नहीं आता समझ कि करना क्या है जीवन में,

तब भी हम कुछ कर ही रहे होते हैं।।
जब चलते रहते हैं भीड़ के साथ एकसार होकर अपनी राह,
तब भी पहचान ख़ोज रहे होते है।।
जब उदास से चेहरे पर कई रेखाएँ ओढ़ लेते हैं चिंता की,
तब भी कुछ उसका हल ढूंढ

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ज्ञान


Saturday, 09 May 2020 21:26:08
Manju Thapa

तुम जब कभी आकर देखोगे,

वही मकान और आँगन द्वार
सब कुछ अपरिवर्तित होगा...सिवा तुम्हारे,
क्योंकि तब तुम अपरिचित पथिक होगे,
जो न जाने कौन से देश से है?
क्यों आया और कब जाएगा?
रुकेगा क्यों?
यात्री ...यायावर की तरह फिर किस

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यूँ हीं


Saturday, 09 May 2020 21:05:58
Manju Thapa

यूँ ही ना बीते ये दिन।।


शीतल नदी के शांत किनारे,
समीर की हल्की आहट के सहारे 
उड़ जाते बिना क्षण गिन।।

कचनार खिलता जहाँ पर भी,
दिखता बसंत उस पार सभी
सूना बाकी उसके बिन।।

निश्

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विचार


Friday, 08 May 2020 03:12:54
Manju Thapa

बरसता जब बादल यहाँ, दूर कोई रोता होगा।

उड़ जाती नींद आँखों से,मन कहीं खोता होगा।।

उलझन सी घिरती रहती,
                  यहाँ वहाँ चाहे फिरे कहीं।
पर दूर नभ की छाँव में,
  &

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