करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




शुरुआत


Wednesday, 10 June 2020 00:54:11
Manju Thapa

करती हूँ मैं फिर से,

हार के बाद नयी शुरुआत।
इस दुःख का करके अंत,
चलती हूँ दिन और रात।।

क्या हुआ जो अंकित हुआ,
नाम मेरा भी कहीं नहीं।
प्रयास छोड़ दूँ कैसे मैं,
आये विपदा भले कैसी कहीं।
काली रात

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प्रकृति


Saturday, 06 June 2020 20:25:21
Manju Thapa

देख रहे जो तुमको दिखती घने वृक्ष की शीतल छाँव।।
बैठ जाते छाया में इसकी थक जाते जब तुम्हारे पाँव।।
पानी पीते लगता मीठा प्यास बुझाते उर अंतर की।।
शांति मिलती ठंडी मिट्टी की गोद में बैठ के पल भर की।।
क्यों जाते फिर भूल, थोड़ा जाकर दूर 

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बस अब जाना है मुझे


Friday, 05 June 2020 21:49:11
Manju Thapa

बस अब जाना है मुझे।।

रुक गया बहुत बातें करने
कुछ सुने अनसुने किस्से गढ़ने।
चाशनी सी मीठी चाय की ले चुस्कियां
साथ में तीखी चटनी संग पकोड़ियां।
इनको भी पचाना है मुझे।
बस अब जाना है मुझे।।

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एक बार फिर


Friday, 05 June 2020 03:41:15
Manju Thapa

एक बार फ़िर, देख लूँ मुड़कर पीछे,
वापस लौटना संभव नहीं हो पायेगा।

एक बार फिर,सुन लूँ वही मधुर तान,
जाने कानों में ये रस क

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फिर एक बार.....


Thursday, 04 June 2020 23:44:47
Manju Thapa

फिर एक बार मैं ढूँढ रहा हूँ अपनी पराजय।।

विश्वास था ख़ुद पर कर लूँगा सामना 
आते जाते हर एक वार का।
अहम् के आगे झुकना नहीं था,
अचूक था लक्ष्य मेरे हथियार का।
चला गया हूँ निश्चिन्त बनकर अभय।
फिर एक

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