करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




चिंता


Friday, 08 May 2020 03:06:57
Manju Thapa

हुआ आज असहाय फिर।


कण कण में अहंकार भरा
टूट गया वो एक क्षण में।
उद्वेलित किया जिसने था
मिटा दिया एक प्रण में।
मिला नहीं कोई उपाय फिर।

राख हुई नैनों की ज्योति
दीप्त प्रतिबिंबित छाया से।
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रिश्ते


Friday, 08 May 2020 02:58:49
Manju Thapa

इतना आसान नहीं है

रिश्तों को सँजोये रखना।

कुछ रक्त से जुड़े हैं अपने
कुछ संसार से जुड़ते हैं।
निभाते हैं पल का साथ
अपनी सी गति मुड़ते हैं।

इन्हें सहेजना पड़ता

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वर्षा


Friday, 08 May 2020 02:46:46
Manju Thapa

वर्षा, तुम बदलती कई रूप।


अच्छा लगता है आगमन तुम्हारा
खिलता जहाँ का आँगन सारा।
मिलता इस तन को बहुत सुकून
जब कड़े धूप से झुलसाती धूप।

बूँदों की रिमझिम में समेटती
कई मन के सकल विकल राग।
पहुं

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ख़ुशी


Friday, 08 May 2020 02:39:37
Manju Thapa

आज बहुत खुश हूँ मैं।।


मुस्कुराकर करती हूँ स्वागत
सवेरे की गुनगुनी धूप का।
उमंग भरी  मन  में बहुत
तेज़ निखर जाता  रूप का।।

बोझ उतार फेक के मन के
उम्मीदों का सामान संजोया।
पर

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नव वर्ष


Wednesday, 06 May 2020 08:26:00
Manju Thapa

अभिनन्दन करती हूँ मैं

नव चेतना नव हर्ष  का।
स्वागत, आज क्षिति पर
आगमन है नव वर्ष का।।

हुई चिर प्रतीक्षा समाप्त
आ गयी ये  मधुर बेला।
नयी उम्मीद  व  आशा
का सजने  लगा मेला।।

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