करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




फिर एक बार.....


Thursday, 04 June 2020 23:44:47
Manju Thapa

फिर एक बार मैं ढूँढ रहा हूँ अपनी पराजय।।

विश्वास था ख़ुद पर कर लूँगा सामना 
आते जाते हर एक वार का।
अहम् के आगे झुकना नहीं था,
अचूक था लक्ष्य मेरे हथियार का।
चला गया हूँ निश्चिन्त बनकर अभय।
फिर एक

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कोरोना से बचाव


Sunday, 31 May 2020 03:03:19
Manju Thapa

पुकारता  है आज और  कल,

तू ज़रा संभल संभल कर चल।
भारी समय  का हर  एक पल
कोरोना  ने  मचाई  हलचल।।

सिमट गयी आज सारी राहें,
लोग बंद घरों में कैद सारे।
दूरी बढ़ा ली आपस में,
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अशोक


Sunday, 31 May 2020 02:35:39
Manju Thapa

हाँ....मैं अशोक हूँ,जिसे शोक नहीं होता।

सुभद्रांगी प्रिय धर्मा मेरी माता।
पुत्र हूँ बिंदुसार का,चंद्रगुप्त का पोता।
हाँ....मैं अशोक हूँ,जिसे शोक नहीं होता।।

क्रूर,अहंकारी,निरंकुश हूँ अत्याचारी।
काँपता मेरी छवि से हर एक नर

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उम्मीद


Sunday, 24 May 2020 04:50:21
Manju Thapa

कल खुशियाँ बिखरेंगी,इसी उम्मीद पर टिकी है नज़र।
देखती हूँ एकटक घड़ी की सुई को घूमती इधर उधर।।

चलना छोड़ दिया, राह भी अपनी और मंज़िल का पता है,
जब मेहनत की है तो मिलेगा फल, भाग्य का  कैसा डर।।

मैं नहीं समझ

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भाग्य-तारा


Wednesday, 20 May 2020 21:57:02
Manju Thapa

ढूँढता रह गया एक उम्मीद का तारा।

मिला ना कहीं मुझे,सुदूर तक मैंने निहारा।।
थकना नहीं है अपने लक्ष्य को पाने।
कठिन राह देखते ही  बन न  जाए बहाने।।
बैठ जाऊँ तो ओझल हो जाए ना छुपकर,
और एकटक देखने से निकले ही ना डरकर।।
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