करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




सावन


Tuesday, 05 May 2020 08:53:50
Manju Thapa

घिर आयी फिर से बदरा।।


सावन लेकर आया संग अपने,
झीने झीने मीठे सपने।
इठलाते तन मुस्काते मन
सजने लगा नैनों में कजरा।
घिर आयी फिर से बदरा ।।

बनती जाती बूँदों की श्रृंखला,
वन उपवन में सजी हैं

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निंदिया


Tuesday, 05 May 2020 08:41:16
Manju Thapa

झीनी सी पलकों की छाँव में,


निंदिया रानी आओ एक बार

चुपके से पलकों की डोरी में,

बाँध लो मन का अटूट संसार।

छुपने पर भी छुप ना सकूँ मैं,

गहरा दो फिर जादुई  संसा

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मन दूर चला जाता है


Monday, 04 May 2020 00:32:59
Manju Thapa

मन दूर चला जाता है।


जब इसे कोई बात कचोटती है।
चुभती रहती है
और दर्द का बोझ वहन नहीं कर पाता
तब,
मन दूर चला जाता है।।

जब अदृश्य घाव इसे छलनी कर देते।
जीने नहीं देते
और  इच्छा पर

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परीक्षाकाल


Monday, 04 May 2020 00:19:23
Manju Thapa

शोक  के स्थिर युगों  सा

ख़त्म हुआ परीक्षा काल।
निकल चल पड़ा हूँ राही 
लेकर अपने पथ की चाल।।

कुछ किस्से  अपनेपन के
कुछ अनजान एकाकी थे।
कुछ उलझे स्वप्नदर्शी बने
कुछ उन्मुक्त उड़ते पाखी थ

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मन गा रहा है


Monday, 04 May 2020 00:02:32
Manju Thapa

आज मन गा रहा है।


स्वर नहीं, शब्द नहीं,
संगीत का तत्व नहीं,
बेवजह मुस्कुरा रहा है।
आज मन गा रहा  है।।

बात कोई नयी नहीं,
जीवन में  मोड़ नहीं
नया कोई आ  रहा है।
आज म

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