करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




माया


Wednesday, 20 May 2020 21:48:48
Manju Thapa

कहते हैं कि सुख और दुःख ये संसार की निर्मम माया है।
और देखो इसने कैसे इस कोमल मन तन को उलझाया है।।
हँसता नहीं, जितना रोता है उतना है इसका गहरा ताप।
निकलने नहीं देता न जुड़ता कैसा इसकी शक्ति का जाप।।

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तिनका


Saturday, 16 May 2020 20:31:00
Manju Thapa

तिनके....

तुम्हे चुरा लायी गौरैय्या।
किसी की नज़र बचाकर नहीं।
तुम्हे स्वयं से।
तुम यूँ ही अलग थलग पड़े थे...
धूल भरी राह में,
किसी के गन्दगी से सने जूते,चप्पलों से कुचले हुए.....
आहत से दयनीय अवस्था में,
घायल

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शब्द


Saturday, 16 May 2020 20:16:27
Manju Thapa

शब्द.......

उथले नहीं होते।
उजले होते है।
कर देते हैं आसानी से चरित्र का बखान।
चाहे कितना इनको चाशनी में लपेट कर परोसो।खोल देते है कलई मन की तह की
और इंसान ये सोचता है
कि कई रहस्य मैंने छुपा लिए।
सामने वाला जान ही नह

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सोच


Saturday, 16 May 2020 20:12:05
Manju Thapa

वज़ह बहुत हैं खुश होने की।

पर मन फिर भी दुःखता है....
क्यों आँखिर?
नहीं पता...
नहीं सोचता...
इतनी ढेर सारी विचारधाराओं में बहता रहता है।रुकता नहीं।
इसको नहीं है रुक कर सोचने का समय।
सामर्थ्य भी नहीं....
क्यो

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होंसला


Friday, 15 May 2020 00:42:43
Manju Thapa

जब राह चले थे पाने लक्ष्य,

तब पता था मुश्किल होंगे हालात।।
छोटे बड़े हर एक कदम पर ,
बनती  बिगड़ती चलती  थी बात।।
सोचा ना था भाग्य के साथ,
कुछ खेल परिश्रम भी करवायेगा।।
ये समर क्षेत्र है यहां कैसे,
क्या कुछ यू

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