करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




कब तक


Sunday, 03 May 2020 23:51:39
Manju Thapa

कब  तक यूँ खामोश रहोगे,

बिना वजह बिना जज़्बात ।
दिन तभी निकलता है जब
स्याह रात का हो अवसान ।।

दुःख आता सबके जीवन में,
कहीं कम कहीं ज़्यादा भी ।
इतने में ही ख़त्म  हो  गयी,
तुम्हारी ऊर्जा और

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लक्ष्य-गीत


Saturday, 02 May 2020 02:40:28
Manju Thapa

नीरव अरुणिम निःशब्द प्रभात

देता निरंतर नवजीवन का भास्
चलते रहना अडिग अकेले
दूजे मिले तो बढ़ेगा विश्वास
अल्हड़,मस्त मुदित हो रहना
लक्ष्य की पल पल बाँधे आस
जीवन का पथ सुपरिचित हो
राह संयोजित,दिखाएगी प्रकाश
अपलक

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Saturday, 02 May 2020 02:28:08
Manju Thapa

ज़िन्दगी तेरे इतने रूप क्यों हैं।

कभी छाँव तो,तू कभी धूप क्यों है।।

तू प्यार का बरसता सावन
कभी मेघो की गर्जना क्यों है
कभी भीषण गर्मी से क्लांत
इस मन की वर्जना क्यों है।।

इठलाते प्रेम की प्रिय वाणी

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श्रमिक


Saturday, 02 May 2020 02:09:16
Manju Thapa

वे सुन रहे थे अपने हलके पद्चिन्हों की आहट।

ज्यों थक कर डूब रहा भानु दूर नदी के तट।
व्यग्र हाथों से पोंछ रहे  थे वे स्वेद  की  बूँदें।
करते क्या,बैठे रहे बस पलकों को मूँदें ।

निर्लज़्ज़ समय मुँह फेर कर चला गया अब दूर।
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अश्रु-गीत


Saturday, 02 May 2020 01:53:39
Manju Thapa

लेकिन मैं रुक न  सका

इन भीगी पलकों के बीच
टूटकर भी गिर ना सका
स्याह-पीले कपोलों को सींच।।

                     मद्धम हुई दीप्त ज्योति
       

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