करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




महिला दिवस


Thursday, 30 April 2020 08:23:27
Manju Thapa

कितनी वेदनाएं छुपा लेती है

अपने हृदय में नारी
महिला दिवस मना लेती हैं
संचार माध्यमों से सारी
याद दिलाती गरिमा की
पुरजोर अस्तित्व की पैरवी करती
स्वाधिकार एवं समर्थन की
बातें फिर किसी माह ना दिखती
उन्मुक्त खो

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मेरा अस्तित्व


Thursday, 30 April 2020 08:07:30
Manju Thapa

ना धरती,ना अम्बर,ना क्षितिज़ है मेरा।

ना विश्व,ना अपना देश,ना तेरा वो मेरा।।
जन्मदात्री,ना परिवार,कोई लोग ना अपने।
कैसे देखूं नन्ही उलझन इन आँखों से सपने।।

न समय,ना दिन ना प्रहर है मेरा।
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दिशा


Thursday, 30 April 2020 03:03:05
Manju Thapa

रबर बनकर मिटा देता,

दुःख की पेंसिल का हर वार।
लिखने की कोशिश तो करते,
तब दिखती मुश्किल अपार।
स्याह क़लम से बयां किया,
वो एक एक शब्द सटीक था।
पर लेखनी की आभा ने,
झुठला दिया जो ठीक था।
अब कागज़ पर गुस्सा क्यों?

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सीखती हूँ


Thursday, 30 April 2020 02:51:38
Manju Thapa

सीखती हूँ निरंतर....

हमेशा अनुभवों से नहीं,
वो सुधारते हैं!
कितना?
स्मृति धीमी गति से क्षयपात्र की तरह
विलय होती है।
पर ये जो इच्छाशक्ति है मौन सी
रुकने कहाँ देती?
लोग हमेशा कमजोर आंकते हैं।
उपमा

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बेटी


Thursday, 30 April 2020 01:47:09
Manju Thapa

एक छोटी सी आस में, 

ढूँढ  लायी  हूँ  दीर्घ  विश्वास।
ममता हूँ,क्षमता हूँ,
चलती मुझसे जीवन की सांस।
मैं  बेटी  हूँ  पढ़ी लिखी
,विश्व  का  हूँ  मैं  आधार।
आज से नए युग का 

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