करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।




विषय


Wednesday, 29 April 2020 08:21:26
Manju Thapa

मुझे पसंद है रेतीली भूमि पर विचार टटोलते मन।

कुछ तो रुक जाते हैं,
                       पांवों के छालों की सोचकर।।

 जो बह जाते हैं विपरीत समय की धारा के बीच।
कर जाते

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सपने


Wednesday, 29 April 2020 08:10:47
Manju Thapa

सूने होते से अब सपने।।

ना परियों की बातें,ना सपनों के  झूले।
ना खिलखिलाते मन,ना ही डराते तन।
मिलते इनमें ना अपने ।।

नींद के श्यामल गाँव,चलके गहरे पांव।
ये सच ना होंगे,इनकी धीमी सी छाँव ।
कहीं दूर चले पनपने

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विचार


Wednesday, 29 April 2020 02:53:11
Manju Thapa

ठोकर जब भी खाता है।

ये मन बहुत कुम्हलाता है।।

                गिनता ढूँढ ढूँढ वो क्षण।
                जिसने बनाया दुःखी हर कण।।

गलती कह

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ख़ुशी


Wednesday, 29 April 2020 02:42:29
Manju Thapa

उठी है आज फिर से मन में जीने की ललक,

मेरे द्वार ये कौन मलय सी पाती लाया है।।

मिल रही है सबसे जुड़ने की मधुर सौगाते,
इस पल को संजोकर किसने दिखलाया है।।

खुशियों की ढेर सी उम्मीदों से सजा है दिन,
ये किसने कानों

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एक कविता


Wednesday, 29 April 2020 02:32:30
Manju Thapa

एक कविता सार्थक प्रयास बनी,

मेरा उस दिशा तक पहुँचने का,
जिसके पास निश्चित बोध था।।
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