करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

जीवन

जीवन है एक परीक्षा काल।

रुक जाता कुछ आयामों पर,
चलकर अपनी गति से चाल।।

जन्म से बचपन और यौवन,
लेता नए नए प्रश्न पूछ।
किस किसका उत्तर ना दें,
आधे सच और आधे झूठ।
जीना इसके साथ हर हाल।
जीवन है एक परीक्षा काल।।

रुक जाती कभी घड़ी,
मुश्किल भरी दिशा के बीच।
फिर संभालना है खुद को,
विवेक की धारा से सींच।
देता दुःख यही बनता ढाल।।

आशा निराशा,सुख व दुःख,
जैसे हैं दिन और रात।
इनके पल पल में जाने क्या,
बुनते सपने और कई बात।
टेढ़ा मेढ़ा पर सच्चा काल।।







About author
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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।