करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

जब प्यार होता है

जब प्यार होता है।

ये संसृति रुक जाती है साथ हमारे
एक क्षण बहुत संवेदनाएं जी लेता है
सुदूर क्षेत्र तक जाती है ध्वनियां
और मस्तिष्क उन्हें खोज़ लाता है

जब प्यार होता है।
एक पल में कई सदियां गिना देता है
उलझने स्वयं को सुलझाने लगती है
कई ऋतुएँ यूँ ही आती,चले जाती हैं
अमावस चाँदनी रात बन जाती है

जब प्यार होता है
शाश्वत सत्य खोजता नहीं पा लेता है
तत्व,ज्ञान सौंदर्य सीमित हो जाते हैं
दर्शन की सारी आख्याये मिट जाती है
और सनातन विश्व मूक रह जाता है

जब प्यार होता है
तुम तुम और मैं मैं नहीं कहलाते
ये अहम् के धागे टूटने लगते हैं
सम व विषम परिस्थिति नहीं होती
सपने और यथार्थ एक सामान होते हैं


















About author
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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।