करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

 स्वतंत्र

स्वतंत्र तन,स्वतंत्र मन और स्वतंत्र प्राण हैं।

स्वतंत्र हैं विचार और स्वतंत्र अभिमान है।।

स्वतंत्रता के झूले झूलते,
                 स्वतंत्र गगन को चूमते।
स्वतंत्र धरा के आँगन,
                 स्वतंत्र  होकर  घूमते।
स्वतंत्र मातृभूमि है ,स्वतंत्र हमारा मान है।
स्वतंत्र हैं विचार और स्वतंत्र अभिमान है।।

स्वतंत्रता के गीत गाते,
                  स्वतंत्र जगत निहारते।
स्वतंत्र रहे हमेशा हम,
                   सदा  यही  पुकारते ।।
स्वतंत्र भाषा व् गीत,स्वतंत्र ही सम्मान है।
स्वतंत्र हैं विचार और स्वतंत्र अभिमान है।।





About author
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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।