करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

नववर्ष

नव स्वर्णिम बेला का सुभागमन,

कर देता पुरानी स्मृतिया विलीन।।

पर कुछ सुख के साथ

उज्जवलता का दे हाथ

मधुर स्वप्न देखने के लिए दिन,

और हम हो जायें आस में लीन।।

समय प्रोत्साहित करता,

गिरने पर सम्हालता

यदि दुःखी तो आस के क्षण गिन,

आज तू मुझसे भी कुछ छीन।।

लक्ष्य निरंतर बढ़े रहे

हमसे ना वो आगे रहे

निर्मल हो सबका ही तन-मन,

नहीं हो कोई भावना हीन।।।

अंतिम क्षण तक की आस

बाँधे रहो,ना हो निराश

संचित मेरे समय में धन,

इससे मत हो कभी विलीन।।




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