करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

मन गा रहा है

आज मन गा रहा है।


स्वर नहीं, शब्द नहीं,
संगीत का तत्व नहीं,
बेवजह मुस्कुरा रहा है।
आज मन गा रहा  है।।

बात कोई नयी नहीं,
जीवन में  मोड़ नहीं
नया कोई आ  रहा है।
आज मन  गा  रहा है।।

भेद छुपा रखा  नहीं,
खोल दे,वो भाव नहीं
बस ख़ुशी जता रहा है।
आज मन गा रहा है।।

होता ऐसा कभी नहीं,
सोचकर भी सही नहीं,
जाने क्यों बता रहा है।
आज मन गा  रहा है।।





About author
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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।