करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

पाती

पाती अरुण छवि की ओस की बूँदों को,

जो हरी भरी धरा पर बिखरी हुई है।।

पाती सुवासित समीर के मृदुल कणों को,

जो सुन्दर प्रकृति पर घिरी हुई है।।

पाती रश्मिपूरित मेघ की रिमझिम को,

जो क्षितिज़ पार जाकर बरस रही है।।

पाती सरिता के निच्छल वेगो की ध्वनि को,

जो संगीत की धुन पर राग छेड़ रही है।।

पाती निखरती खिलती लता वल्लरियों को,

जो समग्र भूपटल पर खिली हुई है।।

पाती यामिनी के श्यामल सलोने रूप को,

जो स्नेह सिक्त आनंद से भरी हुई है।।




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