करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

कुछ लोग

कुछ लोग,सिर्फ बातों  के अपने  होते हैं।

कुछ लोग ,देखने  भर  के सपने होते  हैं।
कुछ लोग,वो दया दिखाते  हृदय के पार।
कुछ लोग,सँभालते आपका दुःख अपार।
कुछ लोग, हवा से हलके होते उड़  जाते।
कुछ लोग,जहां भी मौका मिले मुड़ जाते।
कुछ लोग,संवेदनाओं का सागर भर  देते।
कुछ लोग,सच और झूठ को झूठ कर देते।
कुछ लोग,इठलाते अपने ही आकर्षण पर।
कुछ लोग,  प्रश्नचिन्ह  लगाते  दर्पण  पर।
कुछ लोग ,डरते  नहीं  डराते हैं  हर  बार।
कुछ लोग,सकुचाते रखते  अपने  विचार।
कुछ लोग ,भागते कर्त्तव्य से  विमुख  हो।
कुछ लोग,सम्हाले हर  हाल  सम्मुख  हो।
कुछ लोग,करते  नहीं  चिंता  संसार  की।
कुछ लोग,सोचते  हैं इसके अभिसार की।





About author
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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।