करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।


उलझे से सवालों में  छोड़  जाती ज़िन्दगी।


ढूँढों तो जाने कितने रंग दिखाती ज़िन्दगी।

डायरी का पन्ना नहीं फाड़ कर फेक दिया।

हर नए  मोड़ पर खड़ा कर लाती ज़िन्दगी।

बरस बिता दो इसमें या पल गुज़ारो दो चार।

नए नए आयामो से रूबरू कराती ज़िन्दगी।

कलह मन के भीतर  या बाहरी आघात हो।

कहीं ना कहीं तो चोट पहुंचाती है ज़िन्दगी।










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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।