करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

जीवन

जीवन एक अनुसंधान है।।


अनुभव के कारागार में रहकर
बुनता  नयी पहचान है।।

छुप जाता आँखों से कभी जो
प्रत्यक्ष उसका सचान है।।

भूल का साक्षात्कार कराकर
देता हितकारी ज्ञान है।।

मोह त्यागे,भागे कौन इससे
ये समर्पित कल्याण है।।

पल पल इसका है मूल्यवान
ये स्वयं एक सम्मान है।।










About author
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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।