करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

जीवन कुछ चलता है ऐसे

जीवन कुछ चलता है ऐसे।। 

दुःख से राग, सुख से विराग, 
बन बिहाग सजता है जैसे।। 
जीवन कुछ चलता है ऐसे।। 

प्रीत संकुचित, मीत किंचित, 
तृण मात्र बिखरे ना कैसे।। 
जीवन कुछ चलता है ऐसे।।

मिथ्या दर्शन, कल्पित चिंतन,
 कुतर्क  के जाले ऐसे वैसे।। 
जीवन कुछ चलता है ऐसे।।





About author
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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।