करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

कोरोना से बचाव

पुकारता  है आज और  कल,

तू ज़रा संभल संभल कर चल।
भारी समय  का हर  एक पल
कोरोना  ने  मचाई  हलचल।।

सिमट गयी आज सारी राहें,
लोग बंद घरों में कैद सारे।
दूरी बढ़ा ली आपस में,
अपने पराये सब इससे हारे।
और क्या कहें छीना इसने
सबका कीमती हर एक पल।
पुकारता है आज और कल
तू ज़रा संभल संभल कर चल।।

जल्दी से भी करके उपाय,
इस वायरस को दूर भगाना है।
सर्दी, जुकाम और बुखार में,
ज़रूर डॉक्टर को दिखाना है।
सभी सार्वजनिक स्थलों पर हमें
मास्क पहन कर जाना है।
यही उपाय करेंगे सुरक्षित
इनका प्रयोग पहले करे केवल।
पुकारता है आज और कल
तू ज़रा संभल संभल कर चल।।

स्वच्छ रखे हाथों को अपने,
धोये हम साबुन से बार बार।
त्वचा,नाक,कान,आँख गला,
इनको छुए न दिन में हर बार।
हाथ ना मिलाएं किसी से,
दूर से करे मन से नमस्कार।
ताकि कम हो पाए इसका कहर
बेहतर बने हमारा आज और कल।
पुकारता है आज और कल
तू ज़रा संभल संभल कर चल।
















About author
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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।