करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

रिश्ते

इतना आसान नहीं है

रिश्तों को सँजोये रखना।

कुछ रक्त से जुड़े हैं अपने
कुछ संसार से जुड़ते हैं।
निभाते हैं पल का साथ
अपनी सी गति मुड़ते हैं।

इन्हें सहेजना पड़ता है
ढूंढ ढूंढकर चुन चुनकर।
धागो में पिरोना होता है
कुछ फंदों में बुन बुनकर।

कुछ उधड़ जाते बार बार
कुछ गाँठ बन रुक जाते हैं।
सपने पूरे होने से पहले
कुछ बीच राह कट जाते हैं।

हँसी के साथ दुःख में भी
कुछ पाना व खोना होता है।
दूर रहे या चाहे पास
पल पल जोड़ना होता है।





About author
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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।