करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

लक्ष्य-गीत

नीरव अरुणिम निःशब्द प्रभात

देता निरंतर नवजीवन का भास्
चलते रहना अडिग अकेले
दूजे मिले तो बढ़ेगा विश्वास
अल्हड़,मस्त मुदित हो रहना
लक्ष्य की पल पल बाँधे आस
जीवन का पथ सुपरिचित हो
राह संयोजित,दिखाएगी प्रकाश
अपलक नैनों को बाँधे रखकर
जाना तुम दूर क्षितिज़ के पास
कैसे नहीं ढूँढ पाओगे सुदिशा
साथ हो दृढ़ संकल्प आकाश
आगे बढ़ना,उत्साह भरना
लोगो का मत छूना अविश्वास
मन अविराम झुका देना
अपने पथ पर रखकर आस।

(प्रकाशित)





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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।