करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

साहस

कहीं दूर अकेले निर्जनता में,

                     जाकर आँसू  बहाओ मत।
बीत जायेगा मुश्किल क्षण,
                     खुद को ऐसे छुपाओ मत।

मुश्किल आती है जीवन में
                      सबके ,अलग अलग रूप।
ढलते हैं सब इनके रंग में,
                      छाँव कहीं और कहीं धूप।
तुम इससे मत टूटो इतने,
                     अवसाद को अपनाओ मत।
बीत जायेगा मुश्किल क्षण,
                     ख़ुद को ऐसे छुपाओ  मत।

दृढ़ निश्चय बनाओ हथियार,
                      इससे करो दुःख  पर  वार।
बीतेगा आज न अच्छा,
                      कल ख़ुशी का होगा संसार।
धैर्य रखो मन में अपने,
                      यादों को कटु बनाओ मत।
बीत जायेगा मुश्किल क्षण,
                      खुद को ऐसे छुपाओ मत।

विश्वास करो पहले खुद पर,
                     दुनिया को तब अपनाओ।
संभाल के अपने क़दमों को,
                     जीवन पथ पर आगे बढ़ाओ।
ख़ुशी की बूँदों को अपनी,
                      व्यर्थ ऐसे ही गिराओ मत।
बीत जायेगा मुश्किल क्षण,
                     खुद को ऐसे छुपाओ मत।





About author
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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।