करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

निंदिया

झीनी सी पलकों की छाँव में,


निंदिया रानी आओ एक बार

चुपके से पलकों की डोरी में,

बाँध लो मन का अटूट संसार।

छुपने पर भी छुप ना सकूँ मैं,

गहरा दो फिर जादुई  संसार।

श्यामल गहरी काजल रेखा से,

कर  लो बंद  नयनों  का  द्वार।





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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।