करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

राग

बीत जाती है दुःख की निशा।

तो सूरज है सुख  की  दिशा।।

उमड़ कर छुपाते बादल बातें,
विचारते पर बरस नहीं  पाते।
वर्षा  करती  इन  पर  प्रहार,
बूँदों से मचाती शोर अपार।।

कल कल सुनो पानी की  धार,
जाना किस ओर करके पुकार।
चलो  ये  चले  सुनाने  कहानी
अपने राग रग में भरकर पानी।

धरती की  भी करुण  पुकार,
अम्बर  दूर, कैसे  जाए  पार।
क्षितिज़ समीप लाता है मौन
इसको  निमंत्रण  देता  कौन।





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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।