करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

विचार

बरसता जब बादल यहाँ, दूर कोई रोता होगा।

उड़ जाती नींद आँखों से,मन कहीं खोता होगा।।

उलझन सी घिरती रहती,
                  यहाँ वहाँ चाहे फिरे कहीं।
पर दूर नभ की छाँव में,
                  तारे कोई  गिनता  होगा।।

आस पर टिकी उम्मीदे,
                 विकल सा दिन निकलता है।
और उमंग से भर जाता
                 जब अपना कोई मिलता होगा।





About author
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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।