करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

सवेरा

ढल गया नभ का अँधेरा।।

आगमन कर रहा

पूर्ण बाँह फैला, सवेरा।।

 

शर्बरी का श्यामल घूँघट,

खोल रहा चंचलता थामे।।

पवन सुगन्धित बहकर,

यह सुख का सपना मेरा।।




About author
Generic placeholder image