करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

ख़ुशी

आज बहुत खुश हूँ मैं।।


मुस्कुराकर करती हूँ स्वागत
सवेरे की गुनगुनी धूप का।
उमंग भरी  मन  में बहुत
तेज़ निखर जाता  रूप का।।

बोझ उतार फेक के मन के
उम्मीदों का सामान संजोया।
परवाह किये बिना कल की
आज को मिट्टी पर  बोया है।।

रोक लिया खुद को बहुत
तय करनी है आगे की राह।
कितनी बाधाएं आए चाहे
तोड़  के पूरी करूँ चाह।।






About author
Generic placeholder image
डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।