करता है उन्मुक्त हास मन, मेरी श्रद्धा ही मेरी आस।। बनकर जीवन एक मृदु पवन, दे जाये मधु आभास।।मेरा आस -पुंज प्रज्वलित, बनकर तम का दृढ़ सहारा।। यह तो प्रेरणा जीवन की, है जीवन का मधुर किनारा।।

एक कविता

एक कविता सार्थक प्रयास बनी,

मेरा उस दिशा तक पहुँचने का,
जिसके पास निश्चित बोध था।।

एक कविता वर्षा  की  बूँदों  में
घुल घुल कर निखरी उस समय,
मेरे  सामने  लक्ष्य  स्पष्ट  था।।

एक कविता दुःख  की घटा  में,
उमड़ उमड़ कर लुप्त  हुई  सहसा
ये खुशियों  का  प्रहर  था।।

एक कविता,उलाहना,क्षोभ,कलह
के गर्त से निकालने में सक्षम थी
मेरा सवेरा सामने खड़ा था

एक कविता अनजाने और पहचाने
लोगो के साथ मिलकर हँसा गयी
जीवन सुन्दर और प्यारा था।।





About author
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डॉ. मंजू थापा

स्वतंत्र रचनाकार,कई पत्र पत्रिकाओं में लेख और कविताएं प्रकाशित। निरंतर रचनात्मक लेखन की राह में समर्पित।। 

ब्लाॅग का उद्देश्य रचनात्मक चिंतन एवं मनोभावों को नई दिशा एवं प्रेरणा मिले,जिससे लेखन प्रभावी और सारगर्भित हो।।